14
Apr
एक एहसास …
प्यार का मीठा एहसास दिलाने लगे हो तुम,
अब तो मुझ से मुझी को चुराने लगे हो तुम|
वीरान थी यह ज़िंदगी तुम्हारे आने से पहले,
खुशियों के सपने मुझे दिखाने लगे हो तुम|
तुम्हारी चाहतों की छाया दिल मे बसी है इस क़दर,
हर पल हर जगह नज़र आने लगे हो तुम|
हर पल मुझे होता है बस तुम्हारा ही एहसास,
इस क़दर मेरी साँसों में समाने लगे हो तुम|
राह चलते हुए अक्सर होता है ये,
कि बन के साया साथ मेरे आने लगे हो तुम|
जाने कौन सी डोर है, जो तुम्हारी ऑर खींचे ले जाती है,
मुझको अपना दीवाना बनाने लगे हो तुम|
तुम्हारे ख़यालों से महेकने लगी है ज़िंदगी मेरी,
मेरे ज़ेह्न-ओ-दिल पे इस क़दर छाने लगे हो तुम|
अक्सर होता है यह महसूस मुझे,
छोड़ के दुनिया, मेरी बाहों में समाने लगे हो तुम|
क्या इस बात का एहसास है तुम्हे,
मेरे हर शेर में, हर कविता में आने लगे हो तुम|
- कृती
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on Thursday, April 14th, 2011 at 4:12 pm and is filed under Self-composed, Thoughts.
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